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मिर्ज़ापुरी मोहल्लों के नाम और उनके पीछे की कहानी

मिर्ज़ापुर शहर का नाम जितना दिलचस्प है उतना ही उस शहर के मोहल्लों के नाम भी, अभी तक आपने इंटरनेट पर इस शहर के इतिहास के बार में पढ़ा होगा, लेकिन कभी इस मिर्ज़ापुर शहर के मोहल्लों के बारे में नही पढ़ा होगा। इसलिए आज हम आपको मिर्ज़ापुर के मोहल्लों के नाम और उनके मतलब भी बताएंगे।

गुरहट्टी – शहर के चर्चित बाजारों में से बाज़ार है एक मुकेरी बाज़ार, हाँ वही मुकेरी बाज़ार जिसका नाम कालीन भईया मिर्ज़ापुर वेब सीरीज़ में लेते हैं। मुकेरी बाज़ार में राशन गल्ला की थोक दुकानें हैं और सब्ज़ी मंडी भी है। इसी मार्केट के एक भाग में गुड़ की बिक्री होती है उसे गुरहट्टी के नाम जानते हैं यह नाम दो शब्दों का योग है गुड़+हट्टी (हाट) मतलब बाज़ार, इसका शाब्दिक अभ्रंश गुरहट्टी हो गया है।

त्रिमोहानी – इसे जगह को “Heart of Mirzapur” मतलब “मिर्ज़ापुर का दिल” कहते हैं। दरअसल यह एक निराहा है जो शहर की सबसे व्यस्ततम रूट को आपस में जोड़ता है। जो कोई भी मिर्ज़ापुर आता है उसका यहाँ आना तय है क्योंकि यहीं से आप इस शहर का सबसे सुंदर घाट देख सकते हैं। पक्के घाट जाने का रास्ता यहीं से हो कर गुज़रता है। इसी तरह और भी रास्ते यहाँ से होकर गुज़रते हैं इसलिए ये मिर्ज़ापुर शहर का केन्द्र माना जाता है। इसका यह नाम “तिराहा” या “त्रिमुखी” होने के कारण पड़ा है। “त्रि+मुँह+ना” “तीर मुहाना” “तिरमोहने” समय के साथ अपभ्रंशों के कारण “त्रिमोहानी” नाम हो गया।

पानदरीबा – मुकेरी बाज़ार के एक हिस्से नाम पानदरीबा है। यह पुरे मण्डल में पान के लिए बहुचर्चित है। यहाँ पर अनेकानेक प्रकार के पान के पत्ते एवं उससे सम्बंधित सामग्री मिलती है, जैसे कत्था, चुना, सुपारी, इलायची, पान मसाला, गुलकंद आदि। अब इस जगह के नाम के बारे में बात करते हैं। अवधि भाषा में जगह को “दर” कहते हैं और यहाँ है-वहाँ है के लिए “ई-बा”, “उ-बा” प्रयोग किया जाता है। इस तर्क अनुसार इसका नाम “पान+दर+ईबा” = पान की जगह यहाँ है।

टेढ़ी नीम – शहर के कुछ पुराने मोहल्लों में से एक यह मोहल्ला अपने अनोखे नाम और काम की वजह से लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। यहाँ मुख्य रूप से लोहे से बनी अलमारियों और बक्सों का काम होता है। आपको हर घर में से धातु के पीटने की आवाज़ सुनाई दे सकती है। इस जगह का नाम इसके मोहल्ले के प्रवेश द्वार पर लगें अति प्राचीन नीम के पड़े कारण पड़ा, जो कि देखने में टेढ़ा दिखाई पड़ता है इसलिए इसे टेढ़ी नीम कहते हैं।

कसरहट्टी – मिर्ज़ापुर शहर की पहचान न सिर्फ़ कालीन से हैं बल्कि पीतल के बर्तनों से देश विदेश में प्रख्यात है। नगर के एक क्षेत्र में हैहयवंशी समुदाय के लोग पीतल के बर्तन को बनाने का काम कई पीढ़ियों से करते आ रहे हैं। यहाँ के लोग अपना उपनाम “कसेरा” प्रयोग करते हैं। यह उपनाम “काँस्यकर” से बना है। जिसका अर्थ होता है काँसे का काम करने वाला और वही कारण है कि इस मोहल्ले को “कसर+हट्टी” = काँसे का बाज़ार कहते हैं ।

महन्त शिवाला – शास्त्री सेतु द्वारा शहर में प्रवेशद्वार के निकट यह मोहल्ला स्तिथ है। जैसा की नाम से स्पष्ट है “महन्त का शिवाला” = किसी पुजारी या पुरोहित का शिवालय। इस शिवालय पीछे कई सारी किंवदंतियां जुड़ी हुई है। जो अभी तक इसके निर्माण से सम्बंधित जानकारियों को पुख्ता नहीं करते हैं।

तिवरानी टोला – त्रिमोहानी-वसलिगंज मार्ग पर स्थित प्राचीन मोहल्लों में एक तिवरानी टोला नाम वहाँ पर हिन्दू धर्म के एक जाति विशेष समुदाय के लोगों के रहने के कारण पड़ा, दरसल यह मोहल्ला ब्राह्मण बाहुल्य है। यहाँ पर “तिवारी” उपनाम के लोग बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इस वजह से पहले इसका नाम “तेवरान”, “तेवराने”, “तिवराना” उसके बाद “तिवरानी टोला” पड़ा।

आगे हम कई सारे प्रसिद्ध मोहल्लों के नाम के बारे में बात करेंगे जैसे चौबे टोला, पैरिया टोला, गणेशगंज, वसलिगंज आदि।

इस जानकारी को हमारी खोजी टीम के सदस्यों ने हर एक मोहल्ले में जाकर वहाँ के लोगों से बातचीत करके सभी तथ्यों की पुष्टि करके जुटाई है। आशा है आपको यह लेख पसन्द आया होगा। हमें कॉमेंट करके ज़रूर बतायें यह लेख कैसा लगा और आप किस-किस मोहल्ले के बारे में जानना चाहेंगे।

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