विकास की धूल या बड़ी भूल : ये है मिर्ज़ापुर

मिर्ज़ापुर में जहाँ से भारत का मानक समय निर्धारित होता हैं वहाँ से जब आप पश्चिम की ओर बढेंगे तो लगभग एक किलोमीटर बाद आपको राजमार्ग के बाएं तरफ पहाड़ मिलेगा और दाहिने तरफ रेल की पटरीयां इस मनोरम दृश्य की आप किसी पर्यटन स्थल से तुलना कर सकते हैं, फर्क सिर्फ ये की इस हाईवे पर आपको धुंध कोहरे या कुहासे की नहीं बल्कि धूल की मिलेगी।

इन दिनों चर्चा का बाज़ार गर्म है चर्चा इस बात पर हो रही कि मिर्ज़ापुर वेब सीरिज मिर्ज़ापुरियों के दिल में कितना गर्दा मचा पायी हैं तब इस इस बात पर भी चर्चा कर लिया जाय की मिर्ज़ापुर की सड़के लोगो के फेफड़ों में कितना गर्दा भर रही हैं।

वैसे तो ऊपर बतायी गयी मिर्ज़ापुर को प्रयागराज से जोड़ने वाली सड़क पर निर्माण चल रहा हैं पर धूल की समस्या आपको उस हिस्से में भी मिला जाएगी जहाँ निर्माण कार्य पूरा हो चुका हैं। ना सिर्फ ये सड़क बल्कि रीवां रोड़ रॉबर्ट्सगंज रोड़ और चुनार रोड़ पर भी आपको धूल की समस्या ऐसी ही मिलेगी।

इतना ही नहीं आयुक्त कार्यालय और मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय के बाहर वाली सड़क पर यदि आप जाते हैं तो चौराहा बदलने से पहले धूल से आपका हुलिया बदल सकता हैं।

राजमार्ग के अलावा बात अगर अन्य सम्पर्क मार्गो कि की जाए तो हालत और खस्ता ही दिखेगा। जिगना-श्रीनिवास धाम वाली सड़क हो या मुख्यालय से भटौली/कछवां टाऊन वाली सड़क,सड़के गड्ढों से और आसपास की आब-ओ-हवा धूल से भरी हुई है।

जहाँ एक तरफ इन सड़कों के दोनो ओर लगे पेड़ो कि हरियाली धूल में खो गयी हैं वहीं डाक्टरों की माने तो इससे सड़के किनारे रहने वाले लोगो को श्वसन व नेत्र संबंधी गंभीर बिमारियों का रिस्क हैं खैर रहने वाले तो ऐसे मार्गो पर पानी छिडक कर अपना काम साध ले रहे पर उससे जो कीचड़ हो रहा अगर आप उसमें बाईक या साइकिल लेकर जाते हैं तो सावधान! क्योंकि रिस्क तो वहाँ भी हैं।

Source : Patrika.com

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